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हाथ पकड़ बहना, पहन सक्षमता का गहना |
आवाज़ उठा बुलंद, नहीं अब है पीछे रहना ||

 महिला पिरोई महिला, बनी संगठित ये माला |
माला के हर एक दाने को सुनो क्या है कहना ||

महिला के इस वजूद को, समझ के है जीना |
जो न समझे दुनिया, समझा के पड़े चैना ||
ज़मी हमारा हक है, इसे पा के ही रहेंगे |
हक खोने की फितरत को, खोके ही है रहना ||
महिला चेतना कहता  है, उठो जागो सारे |
जो सोये हो अब तक, तुम्हे अब है जागना ||
इन्डकेयर  का नारा है, हमें साथ है बढना |
इरादे हो बुलंद तो अब नहीं है थमना || 
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